पशु -एक बेजुबान प्राणी

                          पशु -एक बेजुबान प्राणी

क्या आप भी मेरी तरह एक जानवर प्रेमी है? अगर है तो कैसा  महसूस होता है जब आप किसी जानवर को सड़क पर घायल चाहे वो गाय, भूखा कुत्ता या कोई और ही जानवर क्यों न हो देखते होंगे। दुनिया भर में हर साल करोड़ों जानवर क्रूरता का शिकार होते है,जैसे कभी मनोरंजन में इस्तेमाल किए जाते है,कभी फैशन के लिए तो कभी सिर्फ इंसानी स्वार्थ के लिए। हम इंसान तो  भूल ही गए है कि जानवर भी हमारे भगवान के ही अनमोल देन है l पर्यावरण का हिस्सा है। हम इंसान तो मानो उन्हें अपनी पर्सनल प्रॉपर्टी के तौर पे इस्तेमाल करते है। लेकिन क्या हम इस जानवर क्रूरता को रोक सकते है? आइए जानते है इस ब्लॉग में!










हमारे समाज में कई तरह के जानवरों पे अत्याचार और बुरा व्यवहार किया जाता है उसे (animal cruelty) कहा जाता है। ये कई रूपों में हो सकता है जैसे पालतू जानवर पर अत्याचार, अपने मनोरंजन के लिए उन्हें पत्थर से मारना, भूखा रखना, घोड़ों या बेलो पे बहुत ज्यादा बोझ देके उन्हें कई किलोमीटर तक चलवाना और भी बहुत सारे अत्याचार होते है। पृथ्वी पे जितने भी जानवर है,हर जानवर पे कुछ न कुछ अत्याचार इंसानों द्वारा कराई जाती है, चलिए इसको डिटेल में जानते है कि कौन से जानवर पे क्या अत्याचार होती है-

1- फैशन इंडस्ट्री और फॉर्मिंग 

मगरमच्छ के चमड़े, भेड़ से ऊन और फर के लिए उन्हें मारा जाता है ताकि उससे निकलने वाले चीजें से स्वेटर, जूते या और भी चीजें बने,  कॉस्मेटिक और स्क्रीन केयर प्रोडक्ट्स की टेस्टिंग के लिए भी जानवरों के उपयोग किया जाता है।


2-तीर्थ यात्रा के लिए भी जानवरों के उपयोग किया जाता है-

हम इंसान तो इतना नीचे गिर गए हैं कि हमें भगवान के दर्शन करने के लिए भी जानवरों की
 हिंसा करते है, उन्हें चोट पहुंचते हैं,  हाल में ही एक रिपोर्ट सामने आई कि  हर महीने करीब 100  से ज्यादा घोड़ों और खच्चरों की मौत होती है और इसकी सबसे बड़ी वज़ह की इन्हें या तो खाना ओर पोषण समय से नहीं मिलता है और ज्यादा बोझ देके इन्हें तुरंत तुरंत चलवाया जाता है जिससे इनको आराम करने के समय नही मिलता सिर्फ चंद पैसे की वजह से इनके साथ इतना बुरा व्यवहार किया जाता है और जब वे मर जाते है तो उन्हें पहाड़ों से ही खाई में धकेल दिया जाता है मानों जैसे वे निर्जीव या कोई खिलौना हो, साल 2023 में उत्तराखंड सरकार से एक मानव संचालन प्रक्रिया लागू की, जिसमें यात्रा के दौरान घोड़ों और खच्चरों की संख्या सीमित करने और उन्हें आराम देने के नियम बनाए गए लेकिन इसके बाद भी तीन महीने के अंदर 100 से अधिक जानवरों की मौत हो गई। उन्हें नशा भी दिया जाता है ताकि वो नशे की हालत में थके नहीं और चलते रहे|

3- मांस और डेयरी के लिए अत्याचार-
दूध के लिए गायों को तो मानो एक मशीन की तरह उपयोग किया जाता है उससे जबरदस्ती हार्मोन दिए जाते है। अगर गाय किसी तरह दूध नहीं दे पाती है तो इससे बाहर छोड़ दिया जाता है और वो भूख की वजह से इधर उधर सड़कों पे भटकती रहती है और खाने की तलाश में प्लास्टिक भी खा जाती है जिससे उनकी मृत्यु भी हो जाती है|

4 - इंसान तो मांसाहारी जानवर तक को भी नहीं छोड़ते अवैध शिकार और तस्करी करते है,बाघ, गैंडे और हाथी जैसे जानवरों का शिकार खाल, हड्डियों और हाथीदांत के लिए किया जाता है-
अगर यूंही हमलोग जानवरों पे अत्याचार करते रहेंगे तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा जो कोई सोच भी नहीं सकता, किसी भी जीव का शिकार करने से उसका पूरा इकोसिस्टम प्रभावित होता है, बहुत सारे जानवर तो विलुप्त हो रही है जो प्रकृति की लिए बहुत बुरा संदेश है।

जानवरों में भी भावनाएं होती है, उन्हें भी दर्द महसूस होता है, डर लगता है, उन्हें बस प्यार और देखभाल चाहिए होती है हर इंसान का कर्तव्य है कि वो अपने इकोसिस्टम को बचाए , हमलोग ने तो उनसे घरों को भी छीन लिया है सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए,  क्या उनका कोई हक नहीं की वो भी हमारी तरह जीए? अगर इससे रोकना हैं तो हमें सोशल मीडिया और कैंपेन के जरिए लोगों से जानवर पे होनी वाली अत्याचार के बारे में जागरूक करे, ethical tourism  को बढ़ावा दे,जहां जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में रहने दिया जाए।
 NGO, PETA, WWF जैसे संगठनो को सपोर्ट करे।
अपने क्षेत्र में काम कर रही animal welfare societies से जुड़े।
 यह एक गंभीर समस्या है लेकिन अगर हम सब मिलके सही कदम उठाएं तो इसे रोका जा सकता है, पशु भी इस धरती का हिस्सा है और उन्हें भी सम्मान, प्यार,सुरक्षा की जरूरत है। आप अगर जानवर से प्यार करते है या जरा भी उनके लिए पॉजिटिव भावना है तो उनके लिए आवाज़ उठाए और रक्षा करे।
 

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